Monday, December 1, 2008

आंखों के सामने......

आपके आंसू मेरी आंखों में हैं, आपका दिल मेरे पास है।
आपकी वफ़ा हूँ मैं, आपका प्यार हूँ मैं।
मेरी हर साँस में हैं आप बसे, तो हम तुम जुदा कहाँ हैं।
हम तो एक-दूसरे में हैं, सिर्फ़ आपसे ही हमें प्यार है।
दूर होकर भी हमें महसूस होता है, एक-दूसरे का स्पर्श।
महसूस करते हैं हम, रग-रग में आपका साथ।
आपकी ही छवि ही थी, जिसे पल-पल सोचा था।
आप हैं मेरी पलकों में, आप है मेरी गोद में, मेरी साँसों में।
तो बताइए, कहाँ हैं हम एक-दूसरे से दूर।
इन्तजार है हमें आपका, और रहेगा हमें आपका
ही इन्तजार..................।

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