Sunday, June 1, 2014

Modi Cabinet's first day: 24 hours, 24 things


The first Union Cabinet meeting headed by Prime Minister Narendra Modi was held on Tuesday evening in New Delhi. Here are 24 things, which the new Union Cabinet took in past 24 hours.

1. Narendra Modi takes oath as prime minister at 6 pm, May 26.
2. 45 ministers swear in with him.
3. Allies start bickering after the swearing-in ceremony.
4. Shiv Sena miffed, Anant Geete refuses to accept heavy industries portfolio.
5. May 27 morning, PM Narendra Modi assumes office.
6. Modi's first decision as PM: Announces compensation to families of the dead in UP train accident.
7. Meets SAARC leaders.
8. Defence Minister Arun Jaitley condoles death of pilot in MiG-21 crash in Kashmir.
9. Jaitley thanks Modi for entrusting important ministries to him.
10. No controversy over new Army chief, says Jaitley.
11. Jaitley gives assurance: Council of ministers will be expanded soon.
12. Petroleum Minister Dharmendra Pradhan says: India can become an economic superpower if it became self-reliant in energy.
13 Information and Broadcasting minister Prakash Javadekar: No plans to control the media.
14 Security of passengers is top priority: Railway Minister DV Sadananda Gowda
15 Will consult global experts to improve healthcare policy: Health Minister Dr Harsh Vardhan
16 Modi meets Pakistan PM Nawaz Sharif for 45 minutes at Hyderabad House.
17 Modi tells Sharif: Stop terror from Pak soil
18 Sharif apologises for making the media wait for 2.5 hours.
19 Sharif invites Modi to Pakistan, says talks between foreign secretaries soon.
20 Happy to be in India and meet Narendra Modi, says Pak PM
21 Modi calls on former PM Manmohan Singh at his new residence.
22 Ready for debate on Article 370, says MoS (PMO) Jitendra Singh
23 Modi wishes Nitin Gadkari on his birthday before first Cabinet meet begins.
24 Modi Cabinet begins its first meeting in South Block.
This post published on 27th may in INDIA TODAY....Modi Cabinet's first day: 24 hours, 24 things

नरेंद्र मोदी सरकार के शुरुआती 24 घंटों की 24 खास बातें


पिछले 24 घंटे में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके मंत्रियों ने कई रंग दिखाए और देखें. सोमवार शाम छह बजे शपथ ग्रहण समारोह से शुरू हुआ 24 घंटा मंगलवार शाम छह बजे उनकी पहली कैबिनेट की बैठक के साथ खत्‍म हुआ. इस दौरान जहां मजबूत इरादों के साथ विकास के वादे गूंजे वहीं मंत्रिमंडल में ज्‍यादा भाव न मिलने से कुछ दल बौखला भी गए. पेश हैं वादों, जज्‍बातों और बदलते रिश्‍तों के मोदी सरकार के पहले 24 घंटों के 24 रंग....

रात शुरू होते ही नाटक शुरू...
1.
मोदी ने सोमवार शाम को छह बजे पीएम पद की शपथ ली.
2. अपने 45 मंत्रियों को शपथ दिलवाई.
3. रात से ही शुरू हो गया सहयोगी दलों का बिफरना.
4. शिवसेना नाराज, अनंत गीते ने नहीं संभाला कार्यभार.
5. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को औपचारिक रूप से पदभार ग्रहण किया.

पहले फैसले में मोदी ने दी आर्थिक मदद
6.
अपने पहले निर्णय में पीएम ने यूपी ट्रेन दुर्घटना में मारे गए लोगों के परिजनों को आर्थिक सहायता देने की घोषणा की.
7. सार्क देशों के प्रति‍निधियों से की मोदी ने मुलाकात.
8.
कश्‍मीर में मिग 21 गिरा, पायलट की मौत, रक्षा मंत्री अरुण्‍ा जेटली ने जताया दुख.
9. अरुण जेटली ने महत्‍वपूर्ण विभाग मिलने पर मोदी को किया धन्‍यवाद.
10. रक्षा मंत्री अरुण जेटली बोले, नए सेना प्रमुख पर कोई विवाद नहीं.

जेटली ने बंधाया ढाढस, जल्‍द होगा मंत्रिमंडल का विस्‍तार
11.
अरुण जेटली बोले, जल्‍द किया जाएगा मंत्रिमंडल का विस्‍तार.
12. पेट्रोलियम मंत्री धर्मेद्र प्रधान बोले, भारत यदि ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर हो जाए, तो यह आर्थिक शक्ति बन सकता है.
13. सूचना प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा, मीडिया पर नियंत्रण की कोई योजना नहीं है.
14. रेल मंत्री डीवी सदानंद गौड़ा ने कहा यात्रियों की सुरक्षा सर्वोपरि है.
15. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने कहा कि वह स्वास्थ्य प्रणाली सुधारने के लिए अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों से सलाह लेंगे.

खिले शरीफ बोले, मोदी से मुलाकात का क्‍या कहने...
16. हैदराबाद हाउस में पाकिस्‍तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ से की 45 मिनट तक बाचतीत.
17. शरीफ से बोले मोदी, आतंक के लिए न हो पाक की जमीन का इस्‍तेमाल, तुरंत शुरू करें व्‍यापार.
18. ढाई घंटे मीडिया को इंतजार कराने के बाद नवाज शरीफ ने मांगी माफी.
19. नवाज शरीफ ने मोदी को पाकिस्‍तान बुलाया और कहा विदेश सचिव स्‍तरीय वार्ता होगी जल्‍द.
20. शरीफ बोले, भारत आकर खुश हुए मोदी से मुलाकात का क्‍या कहना.

और मोदी बोले, हैपी बर्थडे गडकरी
21. पूर्व पीएम मनमोहन सिंह से नरेंद्र मोदी ने उनके घर जाकर की मुलाकात.
22. प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री का पदभार ग्रहण करने के तुरंत बाद ही जितेंद्र सिंह बोले, धारा 370 पर हम बहस को तैयार.
23. कैबिनेट बैठक शुरू होने से पहले मोदी ने कहा हैपी बर्थडे गडकरी.
24. साउथ ब्‍लॉक में शुरू हुई मोदी की पहली कैबिनेट की अहम बैठक.
27 मई को आजतक में पब्लिश पोस्ट...देखें...नरेंद्र मोदी सरकार के शुरुआती 24 घंटों की 24 खास बातें

पढ़ें...शरीफ के दिल का हाल, दिमाग की बात


पाकिस्‍तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने हैदराबाद हाउस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से करीब 45 मिनट की मुलाकात की. मुलाकात के बाद एक प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में पाक पीएम ने अपनी शराफत दिखाते हुए सबसे पहले मीडिया के सामने देरी से आने के लिए माफी मांगी फिर भारत आने को लेकर अपने दिल का हाल साझा किया. आइए नजर डालते हैं शरीफ की प्रेस कॉन्‍फ्रेंस पर जिससे जाहिर हुआ उनके दिल का हाल और दिमाग की बात.

दिल का हाल
1. मोदी से मुलाकात बड़ी अच्‍छी रही.
2.
भारत, दिल्‍ली आकर बहुत अच्‍छा लगा.
3. ये बड़ा ही ऐतिहासिक मौका रहा.
4.
मैं चाहता हूं कि नरेंद्र मोदी पाकिस्‍तान आएं.
5.
मोदी की मां को देख, मुझे अपनी मां की याद आई. 

दिमाग की बात
1. वाजपेयी से छूटी बात हमें आगे बढ़ानी है.
2. शांति के बिना विकास संभव नहीं.
3. झगड़े की जगह अब सहयोग पर ध्‍यान देना जरूरी.
4. अविश्‍वास के माहौल से अब हमें आगे बढ़ना होगा.
5. विदेश सचिव स्‍तर की वार्ता जल्‍द होगी.
27 मई को आजतक में पब्लिश पोस्ट...देखें...शरीफ के दिल का हाल, दिमाग की बात

इन्‍होंने मौका देखकर मारा चौका


कहते हैं, राजनीति में वही सफल है जो मौका देखकर चौका मार दे. पूरे देश में कश्‍मीर से कन्‍याकुमारी तक लोकसभा चुनावों के पहले नरेंद्र मोदी की लहर चल रही थी जो बाद में सुनामी में बदल गई. इस लहर के साथ कई बड़े बडे़ आए और मोदी के रथ में सवार हो लिए. इनमें तो कई ऐसे रहे, जिनका एनडीए से छत्‍तीस का आंकड़ा रहा लेकिन हवा देख उन्‍होंने बत्‍तीसी निकाल मोदी का दामन थाम लिया. आइए नजर डालते हैं ऐसे दिग्‍गजों पर जिन्‍होंने चुनाव के पहले तो कंधे पर भगवा झंडा उठाया और चुनाव बाद उठा लिया मंत्रालय का बोझ...

उपेंद्र कुशवाहा
बिहार के पूर्व मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार के सहयोगी रहे उपेंद्र कुशवाहा ने (पार्टी राष्‍ट्रीय लोक समता पार्टी...आरएलएसपी) चुनाव पूर्व बीजेपी नीत एनडीए का दामन थामकर नहले पर दहला मार दिया. यह फैसला इनके लिए रंग लाया और 26 मई, दिन सोमवार को मोदी के मंत्रिमंडल में बतौर राज्‍यमंत्री अपने लिए सीट रिजर्व करा ली.

रामविलास पासवान लंबे समय से लालू यादव की पार्टी राष्‍ट्रीय जनता दल और कांग्रेस के साथ कदमताल करने वाले लोक जनशक्ति पार्टी नेता राम विलास पासवान ने चुनाव के पहले इनसे छिटककर बीजेपी का हाथ थाम लिया. चुनावों के ऐन पहले बीजेपी के साथ जुड़ना इनका फायदेमंद रहा और इनका भी 26 मई को हो गया राजतिलक. पासवान को खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्रालय का कार्यभार सौंपा गया.

राव इंद्रजीत सिंह रॉबर्ट वाड्रा के भूमि सौदों की जांच की मांग कर सुर्खियों में रहे पूर्व केंद्रीय मंत्री व गुड़गांव से कांग्रेस सांसद राव इंद्रजीत सिंह भी गुड़ खाने के लिए महाचुनाव से पहले कमल के साथ हो लिए थे. उन्‍हें पता था कि इस बार हाथ साफ हो जाएगा, इसलिए समय पहले ही वो चेत गए और उस समय की उनकी चेतना सोमवार शाम उनके लिए वरदान बनकर आई. जब वो राज्‍य मंत्री बन सरकार में शामिल हो गए.
26 मई को आजतक में पब्लिश पोस्ट...देखें...इन्‍होंने मौका देखकर मारा चौका

लाख से हारने वाले जेटली, स्‍मृति की चांदी


जब किस्‍मत अपने रंग दिखाती है तो बुझने वाले दीए भी जल उठते हैं. लोकसभा चुनावों में लाख के अंतर से हारने वाले नरेंद्र मोदी की कैबिनेट में छा गए. या फिर यूं कहें कि लोकसभा चुनावों के लूजर्स, नमो मंत्रिमंडल में सबसे बड़े गेनर रहे.

यहां बात हो रही है मोदी की 'छोटी बहन' और अमेठी से कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी से चुनावों में मुंह की खाईं स्‍मृति ईरानी और अमृतसर से कांग्रेस उम्‍मीदवार कैप्‍टन अमरिंदर सिंह से चुनावों में हारे पार्टी के कद्दावर नेता अरुण जेटली की. बीजेपी की 'तुलसी' राहुल गांधी से तकरीबन 1,07,903 वोटों से चुनाव हारी थीं, लेकिन उन्‍हें मानव संसाधन विकास मंत्रालय देकर यह बता दिया गया है कि कुछ भी हो मजबूत आदमी का साथ है तो मजबूत विभाग भी उनके ही खाते में जाएगा.

ऐसे ही पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस उम्मीदवार अमरिंदर सिंह से 1,02,770 मतों के अंतर से हारे बीजेपी के दिग्‍गज नेता अरुण जेटली को भी हारने का बेहतरीन अवॉर्ड मिला है. राज्‍यसभा में विपक्ष के नेता और अपने विश्‍वसनीय सहयोगी अरुण जेटली को मोदी ने वित्‍त मंत्रालय जैसा विभाग देकर यह जता दिया कि हार जीत कोई मायने नहीं रखती. मालूम हो कि जेटली पहली बार लोकसभा चुनाव में उतरे थे, लेकिन पंजाब में अकाली दल-बीजेपी गठबंधन की सरकार होने के बावजूद मिली हार इनके लिए चांदी साबित हुई.
26 मई को आजतक में पब्लिश पोस्ट...देखें...लाख से हारने वाले जेटली, स्‍मृति की चांदी

मोदी की कैबिनेट में स्‍मृति ईरानी सबसे युवा, 62 की उम्र के चार


मोदी के कैबिनेट मंत्रियों में जहां सबसे उम्रदराज नजमा हेपतुल्‍ला नजर आईं वहीं सबसे युवा अमेठी संसदीय क्षेत्र से कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी से चुनाव हारीं स्‍मृति ईरानी ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई. नमो कैबिनेट में 6 महिलाएं शामिल हुईं.

भारत के 15वें प्रधानमंत्री के रूप में सोमवार शाम को राष्‍ट्रपति भवन में नरेंद्र मोदी ने शपथ ले ली. शपथ ग्रहण समारोह में एक बात खुलकर सामने आई कि मोदी,‍ जिनकी उम्र 63 साल है, ने अपने कैबिनेट में सबसे ज्‍यादा तवज्‍जो 62 की उम्र वालों को दी.

ये हैं कैबिनेट मंत्री
1.
राजनाथ सिंह (उम्र 62)
2. सुषमा स्‍वराज (उम्र 62)
3. अरुण जेटली (उम्र 62)
4. एम. वेकैंया नायडू (उम्र 65)
5. नितिन गडकरी (उम्र 58)
6. सदानंद गौड़ा (उम्र 61)
7. उमा भारती उम्र 55)
8. नजमा हेपतुल्‍ला (उम्र 74)
9. गोपीनाथ मुंडे (उम्र 65)
10. रामविलास पासवान (उम्र 68)
11. कलराज मिश्र (उम्र 73)
12. मेनका गांधी (उम्र 58)
13. अनंत कुमार (उम्र 55)
14. रविशंकर प्रसाद (उम्र 60)
15. अशोक गजपति राजू (उम्र 63)
16. अनंत गीते (उम्र 62)
17. हरसिमरत कौर बादल (उम्र 48)
18. नरेंद्र सिंह तोमर उम्र (56 साल)
19. जुएल ओरांव उम्र (53 साल)
20. राधा मोहन सिंह उम्र (65 साल)
21. थावर चंद गहलोत उम्र (66 साल)
22. स्‍मृति ईरानी उम्र (38 साल)
23. हर्षवर्द्धन उम्र (59 साल)

26 मई को आजतक में पब्लिश पोस्ट...देखें...मोदी की कैबिनेट में स्‍मृति ईरानी सबसे युवा, 62 की उम्र के चार

मोदी के 40 मिनट के भाषण की 40 खास बातें



अपने दम पर बीजेपी को ऐतिहासिक जीत दिलाने वाले नरेंद्र मोदी मंगलवार को पार्टी के संसदीय दल के नेता चुन लिए गए. इसके साथ ही गुजरात के मुख्यमंत्री मोदी का प्रधानमंत्री बनने का रास्ता साफ हो गया. देश के भावी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सेंट्रल हॉल में अपने चालीस मिनट के भाषण में चालीस बातों से जहां यह साफ कर दिया कि आज वो जो कुछ हैं उसके पीछे संगठन और वरिष्‍ठ ही हैं तो वहीं उन्‍होंने यह भी बता दिया कि अगले पांच सालों में उनकी सरकार क्‍या रचेगी और कहां बसेगी.
1. ये विजय हमारी नहीं, जनता और कार्यकर्ताओं की है
2. अब परिश्रम की पराकाष्‍ठा करूंगा
3. ये चुनाव एक नई आशा के चुनाव रहे
4. आज अटलजी यहां होते तो सोने पर सुहागा होता
5. आडवाणी जी, आप कृपा शब्‍द का इस्‍तेमाल न करें
6. मातृ सेवा कभी कृपा नहीं हो सकती
7. मैं पदभार नहीं, कार्यभार संभाल रहा हूं
8. अब जिम्‍मेवारी का कालखंड शुरू
9. 2019 में दूंगा देश को रिपोर्ट कार्ड
10. एक अनुशाषित सिपाही की तरह मैंने अध्‍यक्ष जी को रिपोर्ट कार्ड सौंपा
11. एक गरीब परिवार का व्यक्ति आज यहां खड़ा हुआ है
12. जैसे मैंने सीएम बनने के बाद विधानसभा देखी, वैसे ही अब यहां हो रहा है
13. आजादी की जंग लड़ने का सौभाग्‍य नहीं मिला, लेकिन जनता ने हमें जीने का अवसर दिया
14. सकारात्‍मक मार्ग के लिए आशावादी होना जरूरी
15. मैं स्‍वभाव से आशावादी हूं, निराशा छोड़नी होगी
16. आशावादी ही देश में आशा का संचार कर सकते हैं
17. पुराने अनुभव कितने ही बुरे क्यों न हों, निराशा छोड़नी होगी
18. गुजरात में जब भूकंप आया तो लगा राज्‍य बर्बाद हो गया, लेकिन यह खड़ा हुआ और दौड़ा
19. अगर देश फैसला करे तो ये कहां से कहां तक पहुंच सकता है
20. बीजेपी सरकार गरीबों की सरकार है
21. यह है देश के गरीबों, नौजवानों और अस्मिता के लिए लड़ रहीं मां बहनों की सरकार
22. देशवासियों को निराश होने की कभी नौबत नहीं आएगी
23. याद दिलाए अपने पुराने बोल, हम चलें न चलें अब देश चल पड़ा
24. इस बार की रैलियों में लोगों के शरीर पर एक ही कपड़ा था और कंधे में एक ही झंडा बीजेपी का
25. सबका साथ, सबका विकास ही हमारा मंत्र
26. अब हमें मौका देना है, लोगों को अवसर देना है. शक्तियों से भरे लोगों को
27. 125 करोड़ देशवासी आगे बढ़े तो देश आगे बढ़ेगा
28. अगर देशवासियों ने हंग पार्लियामेंट बनाई होती तो कह सकते थे कि सरकार के प्रति गुस्से का कारण था
29. संपूर्ण बहुमत देने का मतलब है कि लोगों ने आशा को अपना वोट दिया
30. लोकसभा चुनावों के नतीजों से दुनिया की नजरों में देश का कद बढ़ा
31. सिर्फ हमारे यह छह सीजन होते हैं. आखिर कहां है इतनी विविधता
32. मोदी इसलिए बड़ा है क्‍योंकि उसको वरिष्‍ठों ने कंधे पर बैठाया हुआ है
33. पंडित दीनदयाल उपाध्‍याय जी के शताब्‍दी वर्ष में पार्टी उनके सपनों को साकार करेगी
34.
पंडित जी के जीवन में विचार से ज्यादा ताकत आचार की थी
35. आज हमें जो भी मिला है, वो तप से मिला है
36. संगठन से ऊपर कुछ भी नहीं, यही सब कुछ
37. पांच पीढ़ी खपी है, तब आज का दिन आया
38. आज अपने कारण यहां नहीं हैं, जनसंघ के दिग्‍गजों की तपस्या के कारण हैं
39. जनसंघ के सभी दिग्‍गजों को किया नमन
40. अपने वरिष्‍ठों से कहा, कभी भी आपको नीचे देखने का अवसर नहीं मिलेगा

20 मई को आजतक में पब्लिश पोस्ट...देखें...मोदी के 40 मिनट के भाषण की 40 खास बातें

Saturday, May 17, 2014

जब मोदी ने कहा, ऐसा पहली बार हुआ है 60-70 सालों में


बीजेपी की जबरदस्‍त जीत के बाद जोश से लबरेज देश के अगले प्रधानमंत्री बनने जा रहे नरेंद्र मोदी ने वड़ोदरा में आयोजित रोड शो के बाद जनता को यह विश्‍वास दिलाया कि अब अच्‍छे दिन आ गए हैं.

जनता के सामने मोदी ने जमकर इमोशनल तीर छोड़े. उन्‍होंने कहा कि आपको मुझ पर भरोसा है और मुझे आप पर. इस भरोसे को मैं कायम रखूंगा. उन्‍होंने कहा कि सरकार चलाने के लिए सबका साथ चाहिए और शुभकामनाएं. बकौल मोदी अब सरकार 125 करोड़ देशवासियों की है. आइए जानते हैं जीत के बाद मोदी के पहले संबोधन में क्‍या है पहली बार.

ऐसा पहली बार हुआ है 60-70 सालों में
- किसी नेता की लोकसभा चुनावों में 5 लाख 70 हजार वोटों से जीत हुई.
- जब आजादी के बाद पैदा होने वाला नेता देश संभालेगा.
- जब देश के 125 करोड़ देशवासी सुराज के लिए जिएंगे और मरेंगे नहीं.
- एनडीए को तीन सौ तक जनता ले गई.
- हम मजदूर नंबर वन हैं. मेरे जैसा मजूदर साठ महीनों में नहीं मिलेगा.
16 मई को आजतक में पब्लिश पोस्ट...देखें...जब नरेंद्र मोदी ने कहा, ऐसा पहली बार हुआ है 60-70 सालों में

ये हैं नरेंद्र मोदी की जीत के 10 कारण


पिछले एक साल से एक जगह होकर हजारों जगह नजर आने वाले बीजेपी के पीएम कैंडिडेट नरेंद्र मोदी छा गए हैं. यूपीए सरकार की लकवाग्रस्‍त नीतियों, असफलताओं और सत्‍ता विरोधी लहर ने बीजेपी के लिए इस बार के लोकसभा चुनावों में संजीवनी का काम किया. और इस पर जो रही सही कसर थी, उसे बीजेपी ने गुजरात के मुख्‍यमंत्री नरेंद्र मोदी को पीएम पद का उम्मीदवार घोषित करके पूरा कर दिया. आइए जानते हैं अपनी आक्रामक और लुभावनी विकास की बातों से जनता को मोहने वाले थ्री डी मोदी की जीत के वो 10 कारण, जिनकी बदौलत आज पूरा माहौल मोदीमय है.

लक्ष्‍य का निर्धारण
पिछले दस सालों से सत्‍ता से दूर रही बीजेपी ने इस बार के लोकसभा चुनावों के लिए साफ-साफ अपने लक्ष्‍य निर्धारित कर रखे थे. बीजेपी नेता सिर्फ और सिर्फ अर्जुन की तरह मछली की आंख पर निशाना लगाए रहे. अधिक से अधिक लोकसभा सीटें अपनी झोली में डालना इनका स्‍पष्‍ट लक्ष्‍य रहा ताकि अगर सरकार बनाने की घड़ी आए तो किसी के आगे हाथ फैलाने की नौबत न आए.

नेता का चयन
कांग्रेस पार्टी की तरह भगवा पार्टी में चुनाव नतीजों के बाद नेता का चयन नहीं होता. यहां पहले से ही गुजरात के मुख्‍यमंत्री नरेंद्र मोदी को पीएम पद का उम्‍मीदवार घोषित कर दिया गया, जिससे पार्टी और जनता में उनके मायावी व्‍यक्तित्‍व का असर दिखने लगा. नेता का चयन होने से देश दिग्‍भ्रमित नहीं रहा जबकि इसके उलट कांग्रेस में नेता का चयन न होने से पार्टी और उसके समर्थकों दोनों में असमंजस बना रहा. कांग्रेस के लिए नेतृत्‍व का यह खालीपन गंभीर समस्‍या बन गया.

असफलताओं पर निशाना
भारतीय जनता पार्टी ने इस बार के चुनावों में यूपीए की लकवाग्रस्‍त नीतियों और उसकी असफलताओं को जमकर भुनाया. हर पोस्‍ट और पोस्‍टर में केंद्र सरकार की विफलताओं पर निशाना साधा गया. महंगाई, भ्रष्‍टाचार और बेरोजगारी जैसे मुद्दे उठाकर बीजेपी ने समाज के हर तबके को जहां अपने साथ जोड़ने की कोशिश की वहीं यूपीए सरकार को इनसे घेरने की रणनीति बनाई. बढ़ती महंगाई, गिरता विकास दर और घटता विदेशी प्रत्‍यक्ष निवेश जैसे तीर बीजेपी ने अपने तरकश से निकाल यूपीए के खिलाफ चलाए.

जन आंदोलन का लाभ
कांग्रेस सरकार के खिलाफ बढ़ते जन असंतोष का सीधा-सीधा लाभ देश की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बीजेपी को मिलता दिखा. भ्रष्‍टाचार के खिलाफ समाजसेवी अन्‍ना हजारे का आंदोलन हो या फिर दिल्‍ली की वह रात, जिसमें वहशी दरिंदों ने निर्भया को खून के आंसू रुलाए थे, के बाद उपजे आंदोलन ने बीजेपी को सत्‍तासीन कांग्रेस के खिलाफ लहर और मजबूत करने में काफी मदद की. इसके अलावा एंटी इनकमबेंसी भी बीजेपी के पैर जमाने में काफी लाभप्रद साबित हुई.

युवा जोश को साथ लाया
इस बार के लोकसभा चुनावों में बीजेपी के दिग्‍गजों का मुख्‍य फोकस युवा वोटर की ओर रहा. बीजेपी का हर धुरंधर इनसे बदलाव लाने की, बेरोजगारी दूर करने की बात करने लगा. बीजेपी के नेताओं ने आक्रामक तरीके से प्रचार कर युवाओं को अपनी ओर आकर्षित किया. अक्‍सर बीजेपी की हर रैली में यह सुना जाता था कि कांग्रेस के लिए युवा वोटर हैं जबकि बीजेपी के लिए ये युवा शक्ति हैं. बीजेपी के पीएम कैंडिडेट नरेंद्र मोदी के विकास की बातों, मुहावरों और आकर्षक टिप्‍पणियों से युवा वोटर काफी खिंचे.

वृद्ध नेताओं को साइड किया
बीजेपी ने इस बार के लोकसभा चुनावों में अपनी ही पार्टी के कई वरिष्‍ठ नेताओं को यह स्‍पष्‍ट मैसेज दे दिया कि अब वो बुजुर्ग हो चुके हैं और राजनीति की मुख्‍यधारा से उनके किनारे होने का समय आ गया है. इस कड़ी में पार्टी के दिग्‍गज नेता मसलन लालकृष्‍ण्‍ा आडवाणी, सुषमा स्‍वराज जैसे कइयों की कई बातें सिरे से खारिज कर दी गई. भगवा पार्टी में दो चमकते सितारों ने ऐसी स्थिति पैदा कर दी कि जसवंत सिंह जैसे नेता, जो बीजेपी सरकार में विदेश मंत्री रह चुके हैं, उनके पार्टी छोड़ने की नौबत आ गई. मतलब साफ है, सब कुछ नया और चमकता चाहिए.

सोशल मीडिया बिग्रेड
इस बार के आम चुनावों में प्रचार गली और मोहल्‍लों से काफी आगे निकल गया. युवा और साक्षर भारत के लिए इस बार भारतीय जनता पार्टी की सोशल मीडिया बिग्रेड ने फेसबुक और ट्विटर में धमाल ही मचा दिया है. बीजेपी की रैली, प्रचार और पार्टी के मिशन को जबरदस्‍त तरीके से सोशल मीडिया के जरिए लोगों तक पहुंचाया गया. रैली की लाइव कवरेज और लाइव फोटो देकर बीजेपी की सोशल मीडिया बिग्रेड ने काफी हद तक वोटरों को अपनी ओर आकर्षित किया.

तकनीक का जबर्दस्‍त इस्‍तेमाल
बीजेपी ने इन चुनावों में तकनीक का जबरदस्‍त तरीके से इस्‍तेमाल करके मतदाताओं से संपर्क साधा. अपनी रैलियों का थ्रीडी कवरेज, वीडियो कॉन्‍फ्रेंसिंग के जरिए सबसे मीटिंग आदि करके ज्‍यादा से ज्‍यादा अपनी जनहित और केंद्र सरकार की गैरजरूरी नीतियां वोटरों तक पहुंचाईं. चुनाव शुरू होने के बाद देश के तमाम बड़े चैनलों पर पार्टियों के नेताओं को मिली कवरेज पर आई एक रिपोर्ट से पता चला है कि मोदी को अकेले एक तिहाई कवरेज मिली यानी 33 फीसदी समय मिला. दस प्रतिशत अरविंद केजरीवाल को जबकि सोनिया, राहुल और प्रियंका तीनों को 8 प्रतिशत कवरेज मिला.

क्षेत्रीय छत्रपों का साथ
बीजेपी ने अपनी पुरानी रणनीति बदलते हुए इस बार सीधे सीधे क्षेत्रीय छत्रपों के दरवाजों पर दस्‍तक दी. पार्टी के अधिकतर नेता पूरे भारत में क्षेत्रीय दलों से मेल-जोल कायम किए रहे. एक व्‍यक्ति के कारण जहां कुछ दल पार्टी से छिटके हैं तो वहीं कई ने दामन भी थामा है. पार्टी ने अपनी नीति को इस बार थोड़ा लचीला भी बनाया. बीजेपी ने बुधवार को यह स्‍पष्‍ट किया कि चुनाव पूर्व गठबंधन का हिस्सा नहीं रहा कोई भी दल यदि उसे अपना समर्थन देना चाहता है तो उसके लिए पार्टी के दरवाजे खुले हैं.

जनसभाओं का लोक अभियान
बीजेपी के पीएम पद के उम्‍मीदवार नरेंद्र मोदी ने अपने धुंआधार प्रचार अभियान से लोक सभा चुनाव प्रचार का रिकॉर्ड तोड़ दिया है. मोदी अब तक देशभर में 3 लाख किलोमीटर से अधिक दूरी तय कर एक तरह का रिकॉर्ड बना चुके हैं. प्रचार के परंपरागत और नए तौर-तरीकों के मिलेजुले स्वरूप के साथ 5827 कार्यक्रमों में भाग ले चुके हैं. बीजेपी ने इसे भारत के चुनावी इतिहास का सबसे बड़ा जनसंपर्क बताया है. मोदी पिछले साल 15 सितंबर से 25 राज्यों में 437 जनसभाओं को संबोधित कर चुके हैं और 1350 3डी रैलियों में भाग ले चुके हैं.
16 मई को आजतक वेबसाइट मे पब्लिश पोस्ट..देखें..ये हैं नरेंद्र मोदी की जीत के 10 कारण

10 साल की UPA सरकार की 10 गलतियां


 भ्रष्‍टाचार, महंगाई से जनता पिछले कई सालों से त्रस्त है. जनता को यह देन कांग्रेस की अगुवाई वाली यूपीए सरकार की है. जितने जानदार तरीके से आज से दस साल पहले कांग्रेस की अगुवाई में यूपीए यानी संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन ने देश की बागडोर संभाली थी, उतने ही जोरदार तरीके से जनता अब इसे नकारने का मन बना चुकी है. कमजोर नेतृत्‍व, हर मोर्चे में विफलता और त्‍वरित निर्णय न ले पाने का तमगा आज यूपीए के माथे पर दमक रहा है. आइए नजर डालते हैं यूपीए सरकार की दस साल की उन दस भूलों पर, जिन्‍होंने पूरे देश में कांग्रेस विरोधी लहर पैदा की.

गलत नेता का चुनाव
कांग्रेस अध्‍यक्ष सोनिया गांधी ने 2004 के चुनाव में जीत के बाद खुद प्रधानमंत्री नहीं बन कर अपने वफादार टेक्‍नोक्रैट डॉ. मनमोहन सिंह को पीएम का पद दे दिया. कांग्रेस ने बजाय एक मजबूत नेता चुनने के एक मजबूर नेता चुना, वो भी इसलिए ताकि सभी महत्वपूर्ण नियुक्तियों और नीतियों में सोनिया का दखल बना रहे. प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह एक विचारक और विद्वान माने जाते हैं. सिंह को उनके परिश्रम, कार्य के प्रति बौद्धिक सोच और विनम्र व्यवहार के कारण अत्यधिक सम्मान दिया जाता है, लेकिन बतौर एक कुशल राजनीतिज्ञ उन्‍हें कोई सहज नहीं स्‍वीकार करता. इनके अलावा यदि कांग्रेस प्रशासनिक निपुणता के अलावा राजनैतिक निपुणता वाले को सत्‍ता सौंपती तो आज की स्थिति कुछ और होती. यूपीए ने जिस नेता को बागडोर सौंपी है, अक्‍सर उनके शासन के दौरान यह नजर आता रहा कि वो कुछ छिपा रहे हैं.

उम्‍मीदों पर सिर्फ बयान
भ्रष्‍टाचार, महंगाई से पिछले कई सालों से जूझ रही जनता की उम्‍मीदों पर यूपीए सरकार की ओर से केवल बयान ही बयान फेरे गए. आम जनता महंगाई का कोई तोड़ तलाशने के लिए कहती तो दिग्‍गज मंत्री यह कहकर अपना पल्‍ला झाड़ लेते कि आखिर हम क्‍या करें. हमारे पास कोई अलादीन का चिराग तो है नहीं. जिस जनता ने इन्‍हें चुनकर भेजा है, उन्‍हें बस यही सुनकर काम चलाना पड़ता कि उनके प्रतिनिधियों के पास कोई जादुई छड़ी नहीं है, जिसे घुमा दिया और सारी समस्‍याएं दूर हो गईं. समस्‍या सुलझाना तो दूर आग में घी डालने का भी काम कुछ नेताओं ने किया. जैसे कांग्रेसी सांसद राज बब्‍बर ने एक बयान दिया कि आपको 12 रुपये में भरपेट भोजन मिल सकता है.

आंदोलन के प्रति असंवदेनशीलता
देश में बढ़ती अराजकता के खिलाफ यूपीए कार्यकाल के दौरान हुए जन आंदोलनों (मसलन अन्‍ना आंदोलन और निर्भया आंदोलन) को समझने में महानुभाव असफल रहे. इस बात को तो कांग्रेस सरकार के एक कद्दावर मंत्री भी मान चुके हैं. एक बार पत्रकारों के साथ बातचीत में वित्तमंत्री पी. चिदंबरम ने माना था कि 2010-11 सबसे कठिन दिन थे. उन्‍होंने माना कि हमसे कई भूलें हुईं, हमारा लोगों से तालमेल टूट गया था. इसकी वजह यह है कि 2010-11 में दिल्ली और देश के अन्य हिस्सों में भ्रष्टाचार के विरोध में प्रदर्शन हो रहे थे, उस समय लोगों के गुस्से और बदलते हालातों को यूपीए सरकार सही तरीके से समझ नहीं सकी. 2014 के नतीजे इसका नतीजा होंगे.

जनता के प्रति लापरवाही
सोनिया सरकार के हर मंत्रियों पर यह आरोप लगता रहा है कि उनका देश की जनता के लिए रवैया उदासीन भरा रहा है. रक्षा मंत्री एके एंटनी ने संसद में एक ऐसा बयान दिया कि जिससे जनता और देश दोनों शर्मसार हो गए. पुंछ में पांच भारतीय सैनिकों की हत्या पर एंटनी ने कहा था कि हमलावर पाकिस्तानी सेना की वर्दी पहने हुए थे, जबकि रक्षा मंत्रालय ने साफ कहा था कि हमलावरों के साथ पाक सैनिक भी थे. पाक को दोषमुक्‍त बताने वाले इस बयान पर जमकर हंगामा मचा था. निर्भया कांड में यूपीए की चेयरपर्सन सोनिया गांधी के 'रेप जैसे जघन्‍य अपराध पर बयान नहीं कार्यवाही होनी चाहिए' जैसे बयानों ने जनता के प्रति कांग्रेसियों की लापरवाही को साफ तौर पर उजागर किया है.

बड़े आयोजनों पर बड़े सवाल
जितने बड़े लोग, उतने बड़े काम. आजाद भारत का सबसे बड़ा खेल समारोह कांग्रेस सरकार के ही कार्यकाल में हुआ, जिसमें जमकर नेताओं और अधिकारियों ने लूट मचाई. भ्रष्टाचार की वजह से यह सबसे बड़े घोटाले में तब्दील हो गया है. कॉमनवेल्थ गेम्स के नाम पर हर तरफ लूट मची. ऐसा लग रहा कि देश में खेल का नहीं लूट का महोत्सव मनाया जा रहा है. इसके अलावा और भी कई दिग्‍गजों के बड़े कामों ने बड़े नाम किए. चाहे वह 2जी घोटाला हो जिसमें महज 45 मिनट में 1 .76 लाख करोड़ रुपये लूट गए या फिर कोयला घोटाला हो, जिसमें राजनैतिक धुरंधरों के चेहरों पर कालिख पोत दी. जितने ठेके कांग्रेस सरकार के दौरान लिए गए उन सबमें लूट खसोट मची और जमकर सवाल उठे.

आम जनता से दूर रहने का आरोप
कांग्रेस सरकार के दिग्‍गजों पर अक्‍सर यह आरोप लगते रहे कि वो जनता से दूर रहे. बस वो चुनाव के समय ही अपने संसदीय क्षेत्रों में नजर आए. यहां बात औरों की छोडि़ए, कांग्रेस के युवराज और सोनिया गांधी के सुपुत्र राहुल गांधी ही अपने संसदीय क्षेत्र अमेठी में जीतने के बाद बहुत कम गए, ऐसी शिकायतें वहां के बाशिंदों ने उनकी मां सोनिया गांधी से की. इस बार के चुनावों में भगवा पार्टी की लहर कहें या फिर आम आदमी पार्टी की जोरदार दस्‍तक कि कांग्रेस के युवराज मतदान के समय पिछले दस वर्षों में पहली बार अमेठी में मौजूद रहे. जब पार्टी के मुखिया का ये हाल है तो आप अंदाजा लगा सकते है कि बाकी के धुरंधर जनता के लिए कितने समय मौजूद रहे होंगे.

सीबीआई के दुरुपयोग का आरोप
केंद्र में जिसकी सरकार, उसकी सीबीआई. कांग्रेस सरकार अपने दस सालों के कार्यकाल में हमेशा सीबीआई के दुरुपयोग के लिए विपक्षियों के निशाने में आती रही. जहां इस सरकार को अपनी सत्‍ता जाती दिखी वहीं इसने सीबीआई का पत्‍ता चल दिया. फिर चाहे वो सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव हों या फिर डीएमके नेता स्‍टालिन. यूपीए सरकार से समर्थन वापस लेने के तुरंत बाद सीबीआई की ओर से द्रमुक नेता एमके स्टालिन के आवास पर छापा मारा गया था, जिसे जानकार बदले की कार्रवाई के रूप में देख रहे हैं. जहां भगवा पार्टी के अध्‍यक्ष राजनाथ सिंह भी समय समय पर इशरत जहां मुठभेड़ मामले की सीबीआई की जांच को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधते रहे हैं वहीं भ्रष्‍टाचार के खिलाफ बिगुल बजा सरकार की चूलें हिलाने वाले अन्‍ना हजारे भी कांग्रेस पर सीबीआई दुरुपयोग के आरोप मढ़ते रहे हैं.

युवा जोश को साथ लाने में नाकामयाब
राजनैतिक जानकारों की मानें तो यूपीए सरकार युवाओं से काफी दूर रही. इस सरकार ने इन्‍हें साथ लेकर चलने की नहीं सोची जबकि इसके उलट इसकी विरोधी पार्टी बीजेपी इन्‍हें ही अपनी ताकत मान रही है. 18 से 22 साल के करीब 14.93 करोड़ नौजवान 2014 के आम चुनाव में पहली बार वोट देने वाले थे. इन युवाओं के लिए रोजगार का मुद्दा और इसकी चिंता सबसे महत्वपूर्ण रही, जिसमें कांग्रेस सरकार पूरी तरह विफल रही. इन चुनावों में बेरोजगारी अहम मुद्दा रहा. देश के अधिकांश युवजनों की कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की कथनी-करनी में जमीन आसमान के अंतर से मोहभंग की स्थिति है. युवराज राहुल गांधी की आक्रामक भाषण शैली भी युवा वोट बैंक को सम्मोहित नहीं कर पाई है. केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार ने पिछले साल यह माना था कि नाराज युवा, नए मतदाता विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की हार का कारण है. मंत्री ने यह भी स्‍वीकार किया कि नई पीढ़ी ऐसे नेता चाहती है जो फैसले लें और आम आदमी के हितों के लिए नीतियां बनाएं.

तकनीकी उपयोग से परहेज
अपने मुख्‍य विपक्षी दल बीजेपी के मुकाबले कांग्रेस पार्टी तकनीकी के उपयोग में 2014 के आम चुनाव में काफी पीछे रही. इस बात को कांग्रेस पार्टी के कई नेताओं ने भी स्‍वीकारा. कई नेताओं का कहना है कि उनकी सरकार ने बहुत अच्छा काम किया, लेकिन उसका प्रचार नहीं किया जा सका. राहुल गांधी के करीबी नेताओं ने पिछले दिनों कई टीवी इंटरव्यू में यह बात कही है. बताया जाता है कि कांग्रेस ने राहुल गांधी की इमेज बनाने के लिए करीब पांच सौ करोड़ रुपये खर्च किए लेकिन कवरेज के मामले में ये आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल की भी बराबरी नहीं कर पाए. बीजेपी ने जहां थ्री डी रैली, बेहतरीन कवरेज मैनेजमेंट के सहारे अपनी इमेज चमका ली वहीं कांग्रेस के दिग्‍गज इस मामले में काफी दूर रह गए.

खराब चुनावी रणनीति
2014 के लोकसभा चुनावों में अपने मुख्‍य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी के मुकाबले कांग्रेस की चुनावी रणनीति बेहद कमजोर रही. बीजेपी जहां पिछले पांच सालों से इस रणनीति पर जी जान से जुटी थी वहीं कांग्रेस इस विषय में सिर्फ हवा में रहकर ही काम कर रही थी. यूपीए सरकार के टॉप फाइव मंत्रियों में से एक ने खुद हाल में यह माना कि 2009 में बेंगलुरु को छोड़कर कांग्रेस शहरों से मुख्य रूप से जीती थी. कई पिछड़े राज्य जहां यूपीए सरकार ने गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम पर विशेष जोर दिया, वहां से उसे अधिक वोट नहीं मिल पाए थे. ग्रामीण क्षेत्रों से उसके प्रत्याशी कम जीते बजाय शहरी चुनाव क्षेत्रों के. इन बदली स्थिति को देखने के बावजूद उपयुक्त नीतियों को सूत्रबद्ध करने की दिशा में पार्टी पर्याप्त सचेत नहीं हो सकी और वो हाथ पर हाथ धरे बैठे रही. कांग्रेस सरकार के समय हुए घोटालों और असफलताओं को बीजेपी ने जमकर भुनाया.
15 मई को आजतक में पब्लिश पोस्ट, देखें 10 साल की UPA सरकार की 10 गलतियां


Sunday, April 13, 2014

एचपीसी दिल्ली ज़ोन के अध्यक्ष बने पीयूष शर्मा

बहादुरगढ़।
हरियाणा प्रेस क्लब ने पीयूष शर्मा को एचपीसी दिल्ली ज़ोन का अध्यक्ष नियुक्त किया है। यह जानकारी हरियाणा प्रेस क्लब के प्रवक्ता राकेश पंवार ने दी। पंवार ने बताया कि हरियाणा प्रेस क्लब के प्रदेश अध्यक्ष मान सिंह वर्मा ने कार्यकारणी सदस्यों की सलाह पर इंडिया टुडे ग्रुप के सहायक सम्पादक पीयूष शर्मा को हरियाणा प्रेस क्लब के दिल्ली जोन का अध्यक्ष नियुक्त किया है। अपनी नियुक्ति पर पियूष शर्मा ने कहा कि वह इस जिम्मेदारी को निष्ठापूर्वक निभाते हुए हरियाणा प्रेस क्लब के माध्यम से पत्रकारों को सरकार से ज्यादा से ज्यादा सुविधाएं दिलवाने का कार्य करेंगे।

पीयूष
शर्मा की नियुक्ति पर प्रदेशाध्यक्ष मान सिंह वर्मा, महासचिव शिवप्रसाद लाल, प्रवक्ता राकेश पंवार, पीके बसंल, सर्वजीत टिन्ना, सतीश भारती, हरिकिशन शर्मा, एनआर बंसल, चेनसुख गुरहिया, एचपीसी चंडीगढ़ जोन के अध्यक्ष अजय गुप्ता सहित अनेक सदस्यों ने बधाई दी।
हरियाणा प्रेस क्लब के दिल्ली जोन के अध्यक्ष बनने पर वेब, अखबारों में 13 March 2014 को प्रकाशित पोस्ट

लिंक……

http://bhadas4media.com/article-comment/18374-hpc-delhi-zone-resident.html

लोकसभा चुनावी महासमर में उतरीं हम सबकी पार्टी


यदि आपके पास कोई 'गरीब आदमी पार्टी' या 'हम सबकी पार्टी' के प्रत्‍याशी वोट मांगने आ जाएं तो हैरान मत होइएगा, क्‍योंकि चुनावी महाकुंभ में डुबकी लगाने के लिए इस बार कई और नई राजनैतिक पार्टियां मैदान में उतर आईं हैं, जिनके नाम काफी दिलचस्‍प हैं. 10 मार्च को लोकसभा चुनाव घोषित होने से पहले कई नई पार्टियां आयोग में रजिस्‍टर्ड हुईं, जो चुनावी जंग जीते या न जीते लेकिन अपने खाते में गिनती के कुछ वोट तो कर ही लेंगी.

इन नई बनी पार्टियों में सबसे दिलचस्‍प है गरीब आदमी पार्टी. इस पार्टी को बनाने वाले आम आदमी पार्टी के असंतुष्‍ट कार्यकर्ता हैं, जिन्‍होंने दिल्‍ली के पूर्व मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल की नीतियों के खिलाफ बिगुल फूंका. केजरीवाल की तरह यह पार्टी भी उन लोगों ने बनाई है, जो अन्ना आंदोलन में जुड़े हुए थे. इस पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक श्याम भारती हैं. पेश हैं आपके लिए कुछ ऐसी हाल में बनी नई पार्टियां, जो कभी भी, कहीं भी आपसे वोट मांगने के लिए टकरा सकती हैं.

ये हैं कुछ नए दल
- गरीब आदमी पार्टी (उत्‍तम नगर, दिल्‍ली)
- हम सबकी पार्टी (जौनपुर, यूपी)
- राष्‍ट्रीय विकल्‍प पार्टी (बाराबंकी, यूपी)
- अपना दल युनाइटेड पार्टी (कुशीनगर, यूपी)
- सर्वजन समता पार्टी (गाजियाबाद, यूपी)
- सिक्किम लिबरेशन पार्टी (गंगटोक, सिक्किम)
- मानवाधिकार नेशनल पार्टी (अहमदाबाद, गुजरात)
- फ्री थॉट पार्टी ऑफ इंडिया (भुवनेश्‍वर, ओडि़शा)
- भारत देशभक्‍त संगठन (लखनऊ, यूपी)
- भारतीय ग्रामवासी पार्टी (देवरिया, यूपी)
- जनता राज पार्टी (गाजीपुर, यूपी)
- ईटीएमके पार्टी (मदुरै, तमिलनाडु)
- अखिल केरल त्रिनामुल पार्टी (तिरुवनंतपुरम, केरल)
- इंडिपेंडेंट इंडियन कांग्रेस (पुणे, महाराष्‍ट्र)
- महा जन सोशलिस्‍ट पार्टी (हैदराबाद, आंध्रप्रदेश)
- एक्‍स सैनिक किसान पार्टी (कोल्‍लम, केरल)
- जम्‍मू कश्‍मीर पीर पंजाल अवामी पार्टी (पुंछ, जेएंडके)
- अवामी विकास पार्टी (मुंबई, महाराष्‍ट्र)
- गांधी एकता पार्टी (वाराणसी, यूपी)
- हिंदुस्‍तानी अवाम पार्टी (लखनऊ, यूपी)
- भारतीय सामाजिक पार्टी (अलीराजपुर, एमपी)
- अवामी समता पार्टी (लखनऊ, यूपी)
- हरियाणा जनता पार्टी (पानीपत, हरियाणा)
- जन सेवा सहायक पार्टी (रामपुर, यूपी)
- आदर्श मिथिला पार्टी (समस्‍तीपुर, बिहार)
- राष्‍ट्रीय आम पार्टी (मुंबई, महाराष्‍ट्र)
- जय आंध्र पार्टी (ईस्‍ट गोदावरी, आंध्र प्रदेश)
- राष्‍ट्रीय आम पार्टी (राखी सावंत की पार्टी)
आज तक वेब में 4 अप्रैल 2014
को प्रकाशित पोस्ट
लिंक……
http://aajtak.intoday.in/story/hum-sabki-party-in-loksabha-election-1-759990.html